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August 13, 2026

बरेली: छात्रा आत्महत्या प्रकरण में नया मोड़, आरोपी ने वीडियो जारी कर खुद को बताया निर्दोष; हिंदू संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग

बरेली | नौवीं कक्षा की छात्रा की कथित वीडियो वायरल होने के बाद आत्महत्या के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। इस मामले में नामजद तीन कथित गोरक्षक युवकों में से एक निर्दोष राठौर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया है। वहीं हिंदू जागरण मंच समेत कई संगठनों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की की है।

निर्दोष राठौर ने अपने वीडियो में दावा किया कि उनके संगठन के कार्यकर्ताओं ने केवल पुलिस को सूचना देकर होटल में मौजूद कुछ युवकों को पकड़वाने में सहयोग किया था। उनका कहना है कि उन्होंने किसी युवती की पहचान सार्वजनिक नहीं की और केवल पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा किया था। उन्होंने कहा कि “वीडियो बनाना या कार्रवाई का वीडियो साझा करना कोई अपराध नहीं है।”

आरोपी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि व्यक्तिगत रंजिश के चलते उनके साथ देवेंद्र पटेल, हिमांशु पटेल और अन्य साथियों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह पहले भी गोमांस जैसे मामलों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई होती रही तो भविष्य में कोई भी हिंदू संगठन किसी हिंदू लड़की की मदद के लिए आगे आने से बचेगा। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जेल भी जाना पड़ा, तब भी रिहा होने के बाद गोरक्षा का कार्य जारी रखेंगे।

इस बीच हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार फौजी के नेतृत्व में विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसएसपी कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि हिमांशु पटेल, देवेंद्र पटेल और निर्दोष राठौर को बिना ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के एफआईआर में नामजद किया गया है।

संगठन का दावा है कि घटना के समय देवेंद्र पटेल अपने घर पर थे, जबकि निर्दोष राठौर और हिमांशु पटेल पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद वहां पहुंचे थे। उनका कहना है कि उन्होंने न तो किसी युवती का वीडियो बनाया, न उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया और न ही उसकी पहचान उजागर की। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आरोपों के समर्थन में अब तक कोई प्रत्यक्षदर्शी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल या अन्य तकनीकी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।संगठनों के माध्यम से दबाव बनाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस प्रकरण में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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