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June 13, 2026

यूपी में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस, 6 हजार धारकों पर गंभीर मुकदमे , बृजभूषण, राजा भैया, धनंजय, बृजेश सिंह आदि का नाम शामिल

इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 19 बाहुबलियों का पूरा रिकॉर्ड तलब

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में इस समय 10 लाख 8953 शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें से 6062 ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि 23,407 लाइसेंस आवेदन लंबित हैं, जबकि 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक हथियारों के लाइसेंस मौजूद हैं। इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे लोगों को आखिर हथियार रखने की अनुमति कैसे दी गई।

19 बाहुबलियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा

हाईकोर्ट ने प्रदेश के 19 चर्चित बाहुबलियों और आपराधिक छवि वाले लोगों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने सरकार से इनके खिलाफ दर्ज मुकदमों, शस्त्र लाइसेंस, सही पते और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी पेश करने को कहा है।

जिन नामों का रिकॉर्ड मांगा गया है उनमें बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, अब्बास अंसारी, खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनुज सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं।

कोर्ट ने पूछा- हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन क्यों?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों के खुले प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंसी हथियारों के साथ फोटो और वीडियो डालने का चलन समाज में गलत संदेश देता है।

कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई और लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।

सुरक्षा और लाइसेंस दोनों पर सवाल

हाईकोर्ट ने सिर्फ शस्त्र लाइसेंस ही नहीं, बल्कि इन बाहुबलियों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई।

क्या रद्द हो सकते हैं लाइसेंस?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या गलत जानकारी देकर लाइसेंस हासिल करने की बात सामने आती है तो प्रशासन लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अंतिम फैसला कोर्ट और प्रशासनिक जांच पर निर्भर करेगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस विभाग और सभी जिलों के अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है।

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