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October 20, 2026

बरेली में नाबालिग की शादी कराने का आरोप, ग्राम प्रधान जुल्फिकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल

डायल 112 पर सूचना के बावजूद कार्रवाई पर सवाल; परिजनों की आपत्ति के बीच विवाह कराने का आरोप, पॉक्सो से बचने की आशंका

बरेली। क्योलड़िया थाना क्षेत्र के भौआ बाजार में नाबालिग लड़की की कथित शादी का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 16 वर्षीय नाबालिग लड़की  का 20 अप्रैल 2026 को राशिद नामक युवक से विवाह करा दिया गया। मामले में ग्राम प्रधान जुल्फिकार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि लड़की के परिजनों ने विरोध किया था और पुलिस को भी सूचना दी गई थी, इसके बावजूद विवाह संपन्न हो गया।

जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़की पुत्री मोहम्मद शाहरुन और राशिद पुत्र सगीर अहमद, निवासी भौआ बाजार, थाना क्योलड़िया, बरेली के रहने वाले हैं। आरोप है कि राशिद ने लड़की को अपने प्रेमजाल में फंसाया और परिजनों के विरोध के बाद उस पर घर से भागने का दबाव बनाया। स्थिति बिगड़ने पर लड़की के पिता ने डायल 112 पर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि केवल शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की गई।

मां-बाप के साथ जाना चाहती थी लड़की, फिर कैसे करा दी शादी?

मामले का सबसे गंभीर पहलू लड़की की इच्छा और सुरक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि नावालिग लड़की ने शादी से इनकार किया था। इसके बावजूद ग्राम प्रधान जुल्फिकार की भूमिका में विवाह कराए जाने की बात सामने आई है। सवाल उठता है कि यदि लड़की नाबालिग थी और उसके परिजन उसे अपने साथ ले जाना चाहते थे, तो उसे सुरक्षित रूप से माता-पिता के साथ भेजने या बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के बजाय विवाह किन परिस्थितियों में कराया गया?

यह भी आरोप है कि विवाह पुलिस के संज्ञान में हुआ। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि पुलिस को लड़की की उम्र और परिवार की आपत्ति की जानकारी थी या नहीं और उसके बावजूद क्या कदम उठाए गए।

पॉक्सो से बचने के लिए विवाह कराने की आशंका

आरोप है कि युवक ने संभावित पॉक्सो कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से नाबालिग से विवाह किया। हालांकि, इस कथित मंशा की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कानून के तहत नाबालिग की कथित सहमति से यौन अपराध संबंधी कानूनी प्रावधान अपने आप समाप्त नहीं होते।

बताया गया है कि लड़की के राशन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 दर्ज है। यदि यह सही है, तो 20 अप्रैल 2026 को उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी। वास्तविक आयु की पुष्टि जन्म प्रमाणपत्र और विद्यालय के मूल अभिलेखों से किया जाना आवश्यक है।

राजू उर्फ दद्दा समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए

मामले में राजू उर्फ दद्दा, निवासी ग्राम मगरासा, थाना भूता, बरेली की भूमिका पर भी आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उसने युवक के पिता और पुलिस के बीच संपर्क स्थापित कर मामले को निपटाने में भूमिका निभाई। विवाह में कथित गवाहों के रूप में मुजफ्फर और इसरार अहमद के नाम भी सामने आए हैं। एक मौलवी की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है।

आरोप यह भी है कि विवाह से इनकार के बाद युवक ने खुद को चोट पहुंचाई और लड़की के घर पहुंचा, जिससे वह भयभीत हो गई। इसके बाद लड़की द्वारा फांसी लगाने का प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई है। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

22 अप्रैल 2026 को परिवार से मिलने पहुंची एक टीम के अनुसार, परिवार भयभीत था और खुलकर जानकारी देने से बच रहा था। पूरे मामले में नाबालिग की सुरक्षा, उसकी इच्छा और विवाह की परिस्थितियों की जांच अहम है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लड़की के नाबालिग होने, परिजनों के विरोध और डायल 112 पर सूचना दिए जाने की बात सामने आई, तो विवाह किन परिस्थितियों में संपन्न हुआ?पुलिस और ग्राम प्रधान जुल्फिकार की भूमिका की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

फिलहाल, मामले में पुलिस और ग्राम प्रधान का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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