
लोकआवाज । भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी और भावनात्मक पहल सामने आई है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई हिंदू परिवारों ने बॉर्डर फेंसिंग का काम जल्द पूरा कराने के लिए अपनी जमीन स्वेच्छा से बीएसएफ और प्रशासन को देने का फैसला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों से सीमा पर पर्याप्त घेराबंदी नहीं होने के कारण घुसपैठ, तस्करी, चोरी और मवेशियों की तस्करी जैसी समस्याएं बनी हुई थीं। ग्रामीणों का दावा है कि सीमा पार से आने वाले लोगों और तस्करों की गतिविधियों से आम जनजीवन प्रभावित होता रहा है। ऐसे में फेंसिंग को वे अपनी और देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।
33 डेसिमल जमीन दान, कहा- देश की सुरक्षा सबसे ऊपर
माथाभांगा ब्लॉक के सतग्राम मानाबाड़ी क्षेत्र में रहने वाले कुछ परिवारों ने स्वेच्छा से करीब 33 डेसिमल जमीन देने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि फेंसिंग का काम तेजी से पूरा होता है तो सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमने गांव और देश की भलाई के लिए जमीन दी है। फेंसिंग पूरी होने के बाद घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगेगी, जिससे पूरा इलाका सुरक्षित होगा।”
‘पहले होती थीं दिक्कतें, अब मिलेगी सुरक्षा’
ग्रामीणों ने बताया कि फेंसिंग न होने की वजह से पहले चोरी और अवैध गतिविधियों की शिकायतें सामने आती थीं। उनका मानना है कि सीमा पर मजबूत घेराबंदी होने के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आएगी और किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहेंगी।
एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “देश सुरक्षित रहेगा तो हम भी सुरक्षित रहेंगे। जमीन देने का हमारा फैसला राष्ट्रहित में है।”
BSF को मिली जमीन, तेज होगा फेंसिंग कार्य
रिपोर्ट के मुताबिक सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए प्रशासन द्वारा जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फेंसिंग में देरी न हो, इसलिए वे स्वयं आगे आकर सहयोग कर रहे हैं।
सीमा सुरक्षा पर राजनीति भी तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि स्थानीय लोग फेंसिंग का समर्थन कर रहे हैं और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं इस विषय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय सामने आ रही है।
बॉर्डर के लोगों का संदेश
सीमावर्ती ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ उनके गांव की नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का विषय है। उनका मानना है कि मजबूत सीमा सुरक्षा से घुसपैठ और तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी और क्षेत्र में शांति एवं विकास का रास्ता खुलेगा।

Related Posts