
बरेली । बरेली के स्मार्ट सिटी फूड कोर्ट प्रोजेक्ट पर घोटाले के आरोपों ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शासन के आदेश पर अब एडिशनल कमिश्नर प्रीति जायसवाल पूरे मामले की जांच करेंगी।
आरोप है कि करीब 3.02 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन की क्षति और स्ट्रीट वेंडरों के अधिकारों की अनदेखी हुई। जिस फूड कोर्ट को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए विकसित किया गया था, वहां अब रेडीमेड गारमेंट शोरूम की तैयारी होने की बात सामने आई है।
विवाद यहीं नहीं थमा। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने नवंबर 2024 में एक निजी कंपनी को 15 साल का ठेका दे दिया, जबकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इससे नगर निगम को सालाना लाखों रुपये का नुकसान होगा। साथ ही भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप भी लगे हैं।
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व्यापार मंडल की शिकायत के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
सवाल बड़ा है: करोड़ों की लागत से बना फूड कोर्ट आखिर स्ट्रीट वेंडरों के लिए है या निजी कारोबार के लिए? अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।

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