फैक्ट चेक। सोशल मीडिया पर राजस्थान के श्रीगंगानगर में कथित सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता बताकर वायरल किए जा रहे वीडियो भ्रामक पाए गए हैं। इंडिया टुडे फैक्ट चेक की जांच के अनुसार, इन वीडियो का श्रीगंगानगर की घटना से कोई संबंध नहीं है। इनमें उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक नाबालिग पीड़िता दिखाई गई है।
फैक्ट चेक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय बच्ची का अपहरण कर कई दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया और अस्पताल में भर्ती बच्ची के वीडियो उसी घटना के हैं। जांच में यह दावा गलत निकला।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के बिलग्राम क्षेत्र की एक नाबालिग पीड़िता के हैं। मामले में पीड़िता के अस्पताल में भर्ती होने के वीडियो को राजस्थान की घटना से जोड़कर साझा किया गया, जबकि दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं।
जांच के दौरान वीडियो के फ्रेम की रिवर्स सर्च करने पर हरदोई मामले से संबंधित पूर्व प्रकाशित रिपोर्टें मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार, हरदोई की पीड़िता का कथित अपहरण 22 जून को हुआ था और वह 28 जून को स्वयं पुलिस स्टेशन पहुंची थी। इसके बाद उसे चिकित्सकीय जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भेजा गया।
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान पुलिस ने 4 जुलाई को सार्वजनिक रूप से कहा था कि वायरल वीडियो श्रीगंगानगर मामले के नहीं हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर इन वीडियो को श्रीगंगानगर कांड से जोड़कर साझा करना भ्रामक है।
निष्कर्ष:
श्रीगंगानगर गैंगरेप केस के नाम पर वायरल किए जा रहे अस्पताल के वीडियो फर्जी संदर्भ (False Context) के साथ शेयर किए जा रहे हैं। ये वीडियो राजस्थान के नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक अलग घटना से संबंधित हैं।


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