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August 13, 2026

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद के बाद अमेरिका के नए हवाई हमले, कई धमाकों की खबर

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने शनिवार को ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज M/V G-Flex Galaxy पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कथित हमले के जवाब में की गई। यह इस सप्ताह ईरान के खिलाफ अमेरिका की तीसरी सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि आईआरजीसी के हमले में जहाज के एक नागरिक चालक दल का सदस्य लापता हो गया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे वह आगे की यात्रा करने में सक्षम नहीं रहा।

सेंटकॉम का कहना है कि पहले भी ईरान को वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर चेतावनी दी गई थी और उसे समझौते का पालन करने का अवसर दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं होने पर यह सैन्य कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेना के मुताबिक, हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के लिए करता है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, “ईरान ने गलत फैसला लिया। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।”

वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, अमेरिकी हमलों के बाद केश्म द्वीप पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने बंदर अब्बास में तीन और सीरिक में दो धमाकों की जानकारी दी।

इन घटनाओं से कुछ घंटे पहले ईरान ने घोषणा की थी कि उसने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ईरान का दावा है कि एक जहाज ने अनधिकृत मार्ग का इस्तेमाल किया था, जिस पर चेतावनी के तौर पर गोली चलाई गई। आईआरजीसी नौसेना ने कहा है कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी दखल समाप्त नहीं होता, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।

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