
बरेली। बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और गंभीर रूप से घायल करने के मामले में अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। 7 अक्टूबर 2026 को अदालत ने BNSS की धारा 173(4) के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए मामले में उचित धाराओं में FIR दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। थाना प्रभारी को सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने को कहा गया है।
मामले में आवेदक अनिल ने तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश बाबू मिश्रा (SHO) समेत पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप है कि 11 जुलाई 2026 को डायल-112 की सूचना के बाद पुलिस उसे बिथरी चैनपुर थाने ले गई थी। वहां तत्कालीन SHO राजेश बाबू मिश्रा ने कथित तौर पर उसके साथ जातिसूचक टिप्पणी की और मौजूद पुलिसकर्मियों से उसे सबक सिखाने के लिए कहा।
आवेदन के मुताबिक इसके बाद पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अनिल की लोहे की रॉड से पिटाई की। मारपीट में उसका दाहिना हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसका अधिकांश हिस्सा कट गया। अत्यधिक रक्तस्राव के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके हाथ के दो ऑपरेशन हुए। आवेदक ने करीब 45 टांके और 8 से 10 यूनिट रक्त चढ़ाए जाने का भी दावा किया है।
पुलिस ने आरोपों से किया था इनकार
मामले में संबंधित सर्किल ऑफिसर की रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गई। पुलिस की रिपोर्ट में घटना को अलग तरीके से बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अनिल ने कथित तौर पर गुस्से, उत्तेजना और नशे की हालत में CCTV रूम के दरवाजे के शीशे पर हाथ मारा, जिससे वह घायल हुआ। रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों की लापरवाही, दुर्भावना या आपराधिक संलिप्तता नहीं पाए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि आवेदक की ओर से पेश सामग्री प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा करती है, जिसकी जांच किया जाना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि इस स्तर पर उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट आरोपों को पूरी तरह खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
SHO भी आरोपों के घेरे में
मामले में तत्कालीन SHO राजेश बाबू मिश्रा का नाम सीधे आरोपों में है। इसलिए कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दर्ज होने वाली FIR में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी।

कोर्ट का आदेश
अदालत ने BNSS की धारा 173(4) के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए थाना बिथरी चैनपुर को निर्देश दिया कि उचित धाराओं में केस दर्ज कर कानून के अनुसार विवेचना की जाए। साथ ही 7 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

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