Categories

September 13, 2026

बरेली : ‘दरबारे खास’ रेस्टोरेंट में कांवड़ मार्ग पर नॉनवेज परोसने का वीडियो , खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार की क्लीन चिट पर सवाल

15 अगस्त शाम करीब 5 बजे का वीडियो, फिर ‘दरबारे खास’ को क्लीन चिट कैसे?

बरेली। श्रावण मास और कांवड़ यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन के निर्देशों के बीच बरेली के कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ‘दरबारे खास’ रेस्टोरेंट विवादों में है। सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि 15 अगस्त की शाम करीब 5 बजे, जब रेस्टोरेंट के बाहर से कांवड़ियों का जत्था डीजे पर धार्मिक भजनों के साथ गुजर रहा था, उसी दौरान रेस्टोरेंट के अंदर नॉनवेज परोसा जा रहा था।

मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि रेस्टोरेंट की ओर से कथित तौर पर यह बोर्ड/सूचना लगाई गई थी कि “हम सिर्फ शाकाहारी भोजन दे रहे हैं।” ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि उसी दौरान अंदर नॉनवेज परोसे जाने का वीडियो सामने आया है, तो क्या यह सूचना ग्राहकों और प्रशासन को भ्रमित करने वाली थी? इसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी की क्लीन चिट पर बड़ा सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार की कार्रवाई और कथित क्लीन चिट को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि देवेंद्र कुमार ने जांच के बाद ‘दरबारे खास’ को यह कहते हुए क्लीन चिट दी कि रेस्टोरेंट में कोई नॉनवेज नहीं खिलाया जा रहा है।

लेकिन अब 15 अगस्त शाम करीब 5 बजे का बताया जा रहा वीडियो सामने आने के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि देवेंद्र कुमार ने रेस्टोरेंट का सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं चेक किया?

अगर जांच के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी था कि उस समय रेस्टोरेंट के अंदर क्या परोसा जा रहा था, तो रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को जांच का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया?

पत्रकार से ही सीसीटीवी फुटेज मांगने पर सवाल

मामले की जानकारी जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार को दी गई और उनसे कार्रवाई व जांच को लेकर सवाल पूछे गए, तो बताया जा रहा है कि उन्होंने उल्टा पत्रकार से ही सीसीटीवी फुटेज मांग लिया और कहा कि फुटेज मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

यहीं से कई सवाल खड़े होते हैं—अगर सीसीटीवी फुटेज से ही सच्चाई सामने आ सकती है, तो रेस्टोरेंट से सीसीटीवी फुटेज हासिल कर उसकी जांच करना विभाग की जांच प्रक्रिया का हिस्सा क्यों नहीं बना?

  • क्या संबंधित अधिकारी ने रेस्टोरेंट संचालक से 15 अगस्त शाम का पूरा सीसीटीवी रिकॉर्ड मांगा?
  • क्या फुटेज को सुरक्षित कराया गया?
  • क्या कैमरों की रिकॉर्डिंग वास्तव में देखी गई?
  • अगर नहीं, तो फिर बिना सीसीटीवी जांच के रेस्टोरेंट को क्लीन चिट कैसे दी गई?

कार्रवाई के सवाल पर देवेंद्र कुमार के रवैये पर भी सवाल

मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब पत्रकार ने कार्रवाई और जांच को लेकर सवाल किए तो देवेंद्र कुमार कथित तौर पर भड़क गए। आखिर कार्रवाई से जुड़े सवाल पूछे जाने पर अधिकारी को आपत्ति क्यों हुई?

एक सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारी से यदि किसी नियम के उल्लंघन की शिकायत और वीडियो को लेकर सवाल पूछे जाते हैं, तो पारदर्शी जांच और तथ्यात्मक जवाब अपेक्षित है। ऐसे में अधिकारी के कथित रवैये ने मामले को और सवालों के घेरे में ला दिया है।

15 अगस्त के वीडियो के बाद अब क्या कहेंगे देवेंद्र कुमार?

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि यदि वीडियो की तारीख, समय और स्थान की जांच में पुष्टि हो जाती है और उसमें रेस्टोरेंट के अंदर नॉनवेज परोसे जाने की बात सही पाई जाती है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी की पहले की क्लीन चिट का आधार क्या था?

देवेंद्र कुमार से सवाल है—

  • क्या आपने 15 अगस्त शाम करीब 5 बजे का सीसीटीवी फुटेज देखा था?
  • क्या रेस्टोरेंट से उस समय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मांगी गई थी?
  • क्या “हम सिर्फ शाकाहारी भोजन दे रहे हैं” वाले बोर्ड की भी जांच की गई थी?
  • जब आपने कहा कि कोई नॉनवेज नहीं खिलाया जा रहा, तो यह निष्कर्ष किस साक्ष्य के आधार पर निकाला गया?
  • और अब वीडियो सामने आने के बाद आपकी उस रिपोर्ट और क्लीन चिट पर क्या जवाब है?
  • कांवड़ मार्ग पर शासन के आदेशों की अनदेखी का आरोप

कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रा मार्गों पर मांसाहार की बिक्री और परोसने को लेकर प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किए जाते हैं। ऐसे में यदि वीडियो में लगाए जा रहे आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल एक रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासन के आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि योगी सरकार के आदेशों के बावजूद कांवड़ मार्ग पर ऐसी स्थिति कैसे बनी? अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि हुआ तो जिम्मेदारी किसकी है।

अब जांच सिर्फ रेस्टोरेंट की नहीं, क्लीन चिट की भी हो

‘दरबारे खास’ मामले में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नॉनवेज परोसा गया या नहीं, बल्कि सवाल यह भी है कि जांच किस आधार पर की गई और क्लीन चिट किस आधार पर दी गई।

वीडियो की सत्यता, तारीख और समय का तकनीकी सत्यापन, 15 अगस्त शाम का सीसीटीवी फुटेज, रेस्टोरेंट के कर्मचारियों के बयान और खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट—इन सभी की निष्पक्ष जांच से ही पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

अगर वीडियो सही है तो क्लीन चिट पर सवाल जायज हैं, और अगर वीडियो गलत है तो प्रशासन को जांच के जरिए यह भी साफ करना चाहिए।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह ‘दरबारे खास’ के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जांच और क्लीन चिट की प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच कराएगा या मामला सवालों के बीच ही दब जाएगा।

About The Author