
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने संगठन और संभावित प्रत्याशियों के स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में अब केवल टिकट मांगना पर्याप्त नहीं होगा। संभावित दावेदारों को आर्थिक क्षमता, सामाजिक आधार और राजनीतिक स्वीकार्यता की तीन कसौटियों पर खरा उतरना होगा।
टिकट के लिए तीन प्रमुख मानक
कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी ने संभावित प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन प्रमुख मानक तय किए हैं।
1. आर्थिक क्षमता:
दावेदार को चुनाव प्रचार, वाहनों और कार्यालय समेत अन्य चुनावी खर्च को अपने स्तर पर उठाने में सक्षम होना होगा। सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवार के खाते में कम से कम 20 लाख रुपये की उपलब्धता भी देखी जा रही है।
2. सामाजिक आधार:
पार्टी यह भी आकलन करेगी कि संभावित प्रत्याशी की अपने विधानसभा क्षेत्र में जातीय और सामाजिक पकड़ कितनी है। उसका अपना वोट बैंक और क्षेत्र में प्रभाव भी टिकट के चयन में अहम भूमिका निभाएगा।
3. राजनीतिक स्वीकार्यता:
उम्मीदवार भाजपा और सपा जैसे मजबूत राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के सामने मजबूती से चुनाव लड़ने और आक्रामक तरीके से प्रचार करने में सक्षम है या नहीं, इसे भी परखा जाएगा।
पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि कांग्रेस अब ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाना चाहती है जो केवल टिकट के दावेदार न हों, बल्कि चुनाव में पैसा, समय और राजनीतिक ताकत लगाने के लिए तैयार हों।
125 सीटों पर कांग्रेस का विशेष फोकस
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 125 सीटों को कांग्रेस ने प्राथमिकता वाली सीटों के तौर पर चिन्हित किया है। इन सीटों पर संभावित प्रत्याशियों की स्थिति और जमीनी पकड़ की विस्तृत समीक्षा की जा रही है।
इन सीटों पर कांग्रेस अपने पुराने नेताओं के साथ-साथ दूसरी पार्टियों, खासकर सपा-बसपा से असंतुष्ट या मजबूत जनाधार वाले नेताओं पर भी नजर रख रही है। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य सपा के साथ संभावित गठबंधन से पहले अपनी स्थिति मजबूत करना है।
2017 के फॉर्मूले पर सपा से सीट बंटवारे की तैयारी
कांग्रेस और सपा के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन शुरू हो गया है। कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को आधार बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने की तैयारी में है।
2017 में सपा सत्ता में थी और सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था। उस समय कांग्रेस को 106 सीटें दी गई थीं, हालांकि 8 सीटों पर दोनों दलों के बीच फ्रेंडली फाइट भी हुई थी।
कांग्रेस के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि 2027 में सपा और कांग्रेस दोनों विपक्ष में हैं और भाजपा के खिलाफ एक-दूसरे के सहयोगी भी हैं। ऐसे में कांग्रेस 100 से कम सीटों पर समझौता करने के बजाय अपनी मजबूत सीटों पर अधिक हिस्सेदारी चाहती है।
यूपी में सीट बंटवारे की कमान प्रदेश नेतृत्व को
कांग्रेस के भीतर संकेत हैं कि सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की भूमिका अहम होगी। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व वाली प्रदेश इकाई को बातचीत की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।
पार्टी पहले यह स्पष्ट करना चाहती है कि किन सीटों पर कांग्रेस का मजबूत दावा है और किन सीटों पर उसके पास जीतने की क्षमता रखने वाले चेहरे मौजूद हैं।
134 जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष बदले जाने की तैयारी
चुनावी रणनीति के साथ कांग्रेस संगठन में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी जल्द ही उत्तर प्रदेश के 134 जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों को बदल सकती है। मौजूदा पदाधिकारियों की नियुक्ति मार्च 2025 में हुई थी।
नई प्रदेश कार्यकारिणी और संगठन में ‘सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व’ के फॉर्मूले को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसमें OBC और दलित प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है।
कुल मिलाकर कांग्रेस 2027 के चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने, जिताऊ चेहरों की पहचान करने और सपा के साथ संभावित गठबंधन में मजबूत सीटों पर दावेदारी की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। पार्टी के लिए अब चुनौती इन तैयारियों को जमीन पर उतारकर चुनावी प्रदर्शन में बदलने की होगी ।

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