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October 20, 2026

बरेली में ‘जीवन रक्षक’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ, डीआईजी अजय कुमार साहनी ने दिया गोल्डन ऑवर में इलाज का संदेश

विश्व ट्रॉमा दिवस पर SRMS IMS में हुई पहल, सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर

बरेली । सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में घायलों की जान बचाने के लिए समय पर चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में बरेली में ‘जीवन रक्षक’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया गया। विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SRMS IMS) में इस ऐप का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और ट्रॉमा केयर के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

गोल्डन ऑवर में उपचार से बच सकती है जान

कार्यक्रम के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के महत्व पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर चोट लगने के बाद शुरुआती समय बेहद अहम होता है। इस अवधि में सही उपचार मिलने से मरीज की जान बचाने और गंभीर जटिलताओं को कम करने की संभावना बढ़ सकती है। चिकित्सा क्षेत्र में इसी महत्वपूर्ण अवधि को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है।

‘जीवन रक्षक’ मोबाइल ऐप की शुरुआत को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सहायता के महत्व को रेखांकित करना और लोगों को समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, ऐप के तकनीकी फीचर्स, इसके संचालन की प्रक्रिया और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

SRMS IMS में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी रही। इस दौरान ट्रॉमा केयर, सड़क दुर्घटनाओं के बाद त्वरित उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सा व्यवस्था की भूमिका पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

ट्रॉमा में हर सेकंड मायने रखता है

कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा कि गंभीर दुर्घटना के बाद समय पर की गई कार्रवाई जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है। दुर्घटना के बाद घायल को जल्द चिकित्सा सहायता दिलाना, आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना और प्रशिक्षित चिकित्सकीय कर्मियों द्वारा समय पर उपचार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

डीआईजी अजय कुमार साहनी ने सोशल मीडिया पर भी कार्यक्रम की जानकारी साझा की। इस पहल के जरिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और ट्रॉमा केयर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर अहम पहल

सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना आज भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में तकनीक के माध्यम से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की पहल महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। ‘जीवन रक्षक’ ऐप किस तरह काम करेगा, इससे अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय कैसे होगा तथा आम लोगों को इसका लाभ किस प्रकार मिलेगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आने पर इसकी उपयोगिता और स्पष्ट होगी।

विश्व ट्रॉमा दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में मिलने वाली चिकित्सा सहायता किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्य संदेश : दुर्घटना के बाद देरी न करें, घायल को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।

 

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