
‘बरेली मत आना, DIG से बात हो गई है’—वायरल रिकॉर्डिंग में आरोपी के एजेंट से बातचीत का दावा; DIG ने व्यक्ति को पहचानने से किया इनकार
बरेली/बदायूं। करीब 800 करोड़ रुपये के कथित केनविज घोटाले में फरार चल रहे आरोपी कन्हैया गुलाटी को लेकर सामने आई एक कथित Zoom मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग ने पुलिस कार्रवाई और आरोपी के नेटवर्क को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्हैया गुलाटी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस समेत कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
वायरल स्क्रीन रिकॉर्डिंग में कन्हैया गुलाटी अपने एजेंटों से ऑनलाइन बातचीत करता दिखाई दे रहा है। इसी बातचीत के दौरान ‘विनय’ नाम का एक व्यक्ति कन्हैया से कहता सुनाई देता है—“आप बरेली मत आना।” इसके पीछे वह दावा करता है कि उसकी बरेली के DIG अजय सहानी से करीब 15 मिनट बातचीत हुई है। बातचीत में बरेली के SP City मानुष पारिख का भी जिक्र आता है और विनय कथित तौर पर दावा करता है कि SP City भी कन्हैया के पीछे पड़े हैं।
DIG ने कहा- वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को नहीं जानता
मामले में DIG अजय सहानी की ओर से फोन पर दिए गए जवाब के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति को वह नहीं जानते। DIG ने यह भी बताया कि कन्हैया गुलाटी पर 50 हजार रुपये का इनाम उन्होंने ही रखा है। उन्होंने कहा कि कन्हैया के ऑनलाइन मीटिंग करने और पुलिस की पकड़ से दूर रहने के संबंध में जांच एजेंसी ही स्थिति स्पष्ट कर पाएगी।
वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए रिकॉर्डिंग में कही गई बातों को फिलहाल दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मीटिंग में payout और funds को लेकर सवाल
रिकॉर्डिंग में कन्हैया गुलाटी से जुड़े लोगों को payout और funds के बारे में सवाल करते हुए सुना जा सकता है। कथित तौर पर कंपनी के पास मौजूद फंड दिखाने और रकम जारी करने की मांग भी बातचीत में की जा रही है।
एक हिस्से में कन्हैया की आवाज में कथित तौर पर यह कहते सुना जाता है कि फोन न किया जाए, सिर्फ मैसेज किया जाए और जरूरत के मुताबिक वह खुद फोन करेगा। वहीं ‘विनय’ नाम का व्यक्ति करीब 40 लोगों के फोन उठाने और बाकी लोगों के फोन नहीं उठाने की बात करता सुनाई देता है।
बदायूं में भी दर्ज हैं मामले
केनविज प्रकरण का असर सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं बताया जा रहा। कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बदायूं में भी मुकदमे दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बदायूं के निवेशकों ने कंपनी से रकम वापस नहीं मिलने और कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
पुलिस के अनुसार, निवेशकों को कथित तौर पर मुनाफे का लालच देकर रकम लगवाई गई थी। उन्हें हर महीने करीब 5 प्रतिशत तक ब्याज और 22 महीने बाद पूरी रकम लौटाने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। बाद में भुगतान बंद होने पर निवेशकों ने मुकदमे दर्ज कराए।
अब पुलिस के सामने नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
कन्हैया गुलाटी फरार है और उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में अगर वह वास्तव में अपने नेटवर्क के लोगों के साथ ऑनलाइन बैठकें कर रहा है, तो जांच एजेंसियों के सामने उसके डिजिटल संपर्क, एजेंट नेटवर्क और कथित वित्तीय लेनदेन तक पहुंचने की चुनौती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 50 हजार रुपये का इनामी और लुकआउट नोटिस वाला आरोपी ऑनलाइन अपने नेटवर्क के संपर्क में कैसे है और जांच एजेंसियां उसके डिजिटल नेटवर्क तक कितनी पहुंच बना पाई हैं।
वायरल Zoom रिकॉर्डिंग में किए गए दावों और उसमें मौजूद बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। किसी पुलिस अधिकारी की कथित बातचीत को भी जांच के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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