
बरेली। बिजली चोरी के आरोप में एक परिवार का कनेक्शन काटे जाने के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। परिवार का आरोप है कि विभागीय टीम ने घर में बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की और कनेक्शन काट दिया था। लेकिन बड़े अधिकारियों को मामले से अवगत कराने और खबर सामने आने के बाद अगले ही दिन बिजली की लाइन दोबारा जोड़ दी गई।
इस घटनाक्रम के बाद बिजली विभाग की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि विभाग को वास्तव में बिजली चोरी मिली थी और इसी आधार पर कनेक्शन काटा गया था, तो अगले ही दिन कनेक्शन क्यों जोड़ दिया गया? क्या चोरी की पुष्टि करने के लिए कोई मुकदमा या एफआईआर दर्ज की गई? यदि चोरी नहीं मिली तो आखिर किस आधार पर परिवार पर बिजली चोरी का आरोप लगाकर कनेक्शन काटा गया?
परिवार ने इससे पहले आरोप लगाया था कि जुलाई में ₹6,355 का बिजली बिल आया था, जिसका भुगतान प्रेमपाल द्वारा कर दिया गया था और करीब ₹10 की राशि ही बकाया रह गई थी। इसके बावजूद कम बिल आने को आधार बनाकर बिजली चोरी का आरोप लगाया गया।
परिवार के अनुसार कार्रवाई के दौरान घर में अकेली महिला मंजू मौजूद थीं। आरोप है कि करीब 7-8 लोग मौके पर पहुंचे और बिजली चोरी का डर दिखाकर ₹15 हजार मांगने की बात कही गई। परिवार का यह भी आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने पर कनेक्शन काट दिया गया और मीटर तोड़ दिया गया।
SDO दोहना सचिन शर्मा ने पहले कहा था—‘जानकारी नहीं है’, फिर लाइन कैसे जुड़ी?
मामले में जब संबंधित SDO से पहले बात की गई थी तो उन्होंने कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया था। अब सवाल यह है कि यदि SDO को कार्रवाई की जानकारी नहीं थी तो लाइन दोबारा जोड़ने की कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई?
परिवार का दावा है कि बड़े अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराने और मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
कई सवालों के जवाब बाकी
- अगर बिजली चोरी हुई थी तो एफआईआर क्यों नहीं हुई?
- चोरी का आरोप सही था तो अगले दिन कनेक्शन क्यों जोड़ा गया?
- अगर चोरी नहीं हुई थी तो कनेक्शन किस आधार पर काटा गया?
- परिवार से कथित ₹15 हजार मांगने का आरोप क्या सही है?
- मीटर तोड़ने की कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
- जिस टीम ने कनेक्शन काटा, क्या उसी टीम की कार्रवाई की विभागीय जांच होगी?
- क्या मौके की कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड, वीडियो या रिपोर्ट तैयार की गई थी?
मौके पर टीजी-2 शिव रतन राठौर और रमेश चौहान, तथा स्थानीय लाइनमैन नश्रू खान, मंडोई लाल और नरेश आदि के मौजूद होने की बात सामने आई है।
हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभाग की नजर में बिजली चोरी हुई थी तो कनेक्शन बहाल करने की वजह क्या रही और यदि चोरी नहीं हुई थी तो परिवार के खिलाफ की गई कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है?

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