
बरेली। नगर निगम अतिक्रमण की वजह से अस्तित्व खो चुके करीब सौ तालाबों को कब्जामुक्त कराने की तैयारी कर रहा है। वहीं सिविल लाइंस वार्ड में बरेली क्लब और कैंट क्षेत्र से सटे अक्षर विहार तालाब का नाम इस सूची से बाहर होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासनिक जांच में पहले तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि हो चुकी है और वर्ष 2021 में करीब 2,191 वर्गमीटर जमीन कब्जामुक्त कराई गई थी। इसके बावजूद अब दोबारा कब्जे और निर्माण की शिकायतें सामने आई हैं।
फ्रीहोल्ड कर तालाब की जमीन बेचने का मामला
वर्ष 2020 की प्रशासनिक जांच से जुड़े रिकॉर्ड में अक्षर विहार तालाब की जमीन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए थे। तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो वर्ष 1999 में फ्रीहोल्ड हुई जमीन में तालाब की जमीन शामिल होने की जानकारी सामने आई। जांच में तालाब का क्षेत्रफल करीब 16,700 वर्गमीटर बताया गया था।
प्रकरण में मूल प्रमाणित नजूल नक्शा-शजरा, फ्रीहोल्ड फाइल, पैमाइश का मूल नक्शा और जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन दस्तावेजों से तालाब के मूल रकबे, फ्रीहोल्ड की गई जमीन में तालाब की भूमि शामिल होने और कब्जामुक्त कराई गई जमीन के राजस्व चरित्र की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कब्जामुक्त जमीन पर फिर कब्जे के आरोप
प्रशासन ने पैमाइश के बाद तालाब से संबंधित जमीन को कब्जामुक्त कराया था। बाद में उसी क्षेत्र में दोबारा कब्जे और निर्माण की शिकायतें सामने आईं। कार्रवाई में कथित देरी को लेकर भी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षर विहार तालाब की जमीन को लेकर वर्ष 2016 में भी प्रशासनिक स्तर पर जांच हुई थी। वर्ष 2020 में मामला दोबारा सामने आने के बाद रिकॉर्ड खंगाले गए। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि फ्रीहोल्ड प्रक्रिया के दौरान तालाब-पोखर की जमीन पर लागू प्रतिबंधों और भूमि की प्रकृति की जांच किस स्तर पर हुई।
अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई की बात कही
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि मौके पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भेजकर जांच कराई जाएगी। जो स्थिति सामने आएगी, उसी के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
मंडलायुक्त शंभु कुमार ने कहा कि अक्षर विहार तालाब की जमीन से जुड़े प्रकरण में यदि कोई प्रशासनिक शिथिलता हुई है तो उसका परीक्षण कराया जाएगा। नगर आयुक्त से भी मामले की जानकारी ली जाएगी।
वहीं नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि मामला पुराना है, लेकिन यदि प्रशासनिक जांच में तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी तो मामले को दिखवाकर रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अक्षर विहार तालाब का नाम सौ तालाबों को कब्जामुक्त कराने की प्रस्तावित सूची से बाहर होने के बाद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि पहले कब्जामुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा अतिक्रमण कैसे हुआ और तालाब की भूमि के फ्रीहोल्ड से जुड़े पुराने मामलों में अब तक अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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