
बरेली। रक्षाबंधन के मौके पर बरेली क्लब मेला ग्राउंड में आयोजित मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन समारोह में भारी भीड़ के बीच भगदड़ की घटना ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, हादसे में दो बच्चों और एक महिला की मौत की खबर हमने लगाई थी अब उस महिला की जानकारी भी सामने है मृतिका मधु का पति रिटायर्ड फौजी ओर बरेली के सतीपुर की निवासी थी
आयोजकों की ओर से समारोह में 20 हजार से अधिक माताओं-बहनों के पहुंचने का दावा किया गया था। कार्यक्रम की तस्वीरों और वीडियो में बड़ी संख्या में महिलाएं नजर आईं। कई महिलाएं मिट्टी पर बैठी हुई भी दिखाई दीं। इससे आयोजन स्थल पर बैठने, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस-प्रशासन को जानकारी देने पर भी सवाल
इतने बड़े आयोजन में हजारों लोगों के पहुंचने का दावा होने के बावजूद पुलिस-प्रशासन को कार्यक्रम की पूर्व जानकारी और भीड़ का अनुमान कितना था, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि आयोजकों को पहले से 20 हजार से अधिक महिलाओं के पहुंचने की उम्मीद थी, तो भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तथा निकासी व्यवस्था क्यों नहीं की गई—यह जांच का विषय है।
महिलाओं की वापसी के इंतजाम पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए सभासदों की ड्यूटी लगाई गई थी और विभिन्न वार्डों से बड़ी संख्या में महिलाओं को समारोह तक पहुंचाया गया। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महिलाओं को सुरक्षित वापस भेजने के लिए व्यापक इंतजाम नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि कई महिलाएं किराए के साधनों से कार्यक्रम में पहुंचीं और वापसी की व्यवस्था भी उन्हें खुद करनी पड़ी।
‘पीएम और सीएम के आने जैसी व्यवस्था’ का दावा
हादसे के बाद जब कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल किया गया तो मेयर उमेश गौतम के बेटे पार्थ गौतम ने कहा कि व्यवस्था ठीक थी। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में ऐसी व्यवस्था की गई थी, “जैसी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आने पर होती है।” एक आयोजन जिसमें भगदड़ होती है पुलिस व्यवस्था, बैरिकेडिंग कुछ नहीं उसकी तुलना सीएम ओर पीएम के कार्यक्रम से कैसे ओर प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री के लिए आता है जैसे शब्द ये दिखाता है कि बरेली के मेयर के बेटे इन पदों का कितना सम्मान करते है ।
इस बयान के बाद भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि व्यवस्था इतनी व्यापक और सुरक्षित थी, तो फिर हजारों की भीड़ के बीच भगदड़ की स्थिति कैसे पैदा हुई और कथित तौर पर तीन लोगों की जान कैसे चली गई?
अब जांच के घेरे में पूरा आयोजन
कार्यक्रम के दौरान पार्थ गौतम ने अनुमानित 20 हजार से कहीं अधिक माताओं-बहनों के पहुंचने की बात कही थी। महापौर उमेश गौतम एवं पार्थ गौतम फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित समारोह में महिलाओं के लिए रक्षाबंधन के उपहार और भोजन की व्यवस्था की गई थी।
अब सवाल सिर्फ भगदड़ का नहीं, बल्कि आयोजन की अनुमति, पुलिस-प्रशासन को दी गई सूचना, भीड़ का आकलन, प्रवेश-निकास व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, बैठने की क्षमता और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महिलाओं व बच्चों की सुरक्षित वापसी को लेकर भी हैं।
फिलहाल दो बच्चों और एक महिला की मौत के दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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