
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में एक बार फिर ग्लेशियल झील फटने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। झील से बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने के बाद नेपाल में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।
बताया गया है कि तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में बर्फ से ढके पहाड़ पर भूस्खलन के बाद करीब 50 हजार क्यूबिक मीटर बर्फ-मलबा झील में गिरा, जिससे झील का पानी ओवरफ्लो होने लगा। इसके बाद नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फटने की घटना सामने आई।
नेपाल में कई गांव खाली कराए जा रहे
झील फटने के बाद पानी का स्तर बढ़ने और बाढ़ के खतरे को देखते हुए रसुवा जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन को 90 मिनट के लिए रोक दिया गया। भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के आसपास के कई गांवों को खाली कराया जा रहा है। लोगों और सुरक्षाकर्मियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
नेपाल सेना ने 350 मजदूरों को बचाया
इसी बीच नेपाल सेना ने त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे करीब 350 मजदूरों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। सेना के अनुसार अलग-अलग इलाकों से कुल 883 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
नेपाल और तिब्बत में सैकड़ों मौतें, हजारों लापता
रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में अब तक 547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं।
वहीं तिब्बत में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
बाढ़, भूस्खलन और झील फटने की घटनाओं के बाद दोनों देशों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

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