
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड के दाम में करीब 2.25% की तेजी दर्ज की गई।
तेल की कीमतों में उछाल की बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बताई जा रही है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका ने ईरान के 5 ऑयल टैंकर तबाह करने का दावा किया
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के 5 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में की गई।
तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
दुनिया के करीब 20% पेट्रोलियम की आवाजाही इसी समुद्री मार्ग से होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LPG आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमत में करीब 22% की बढ़ोतरी हो चुकी है। 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि अब यह 100 डॉलर के पार पहुंच गया है।
भारत में सरकारी तेल कंपनियां पहले ही मई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
सबसे बड़ी चिंता: अगर होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की ऊर्जा कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।

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