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June 13, 2026

शिक्षकों से भूसा जुटाने का निर्देश, आदेश वायरल होने पर मचा बवाल

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षा विभाग का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल पत्र में शिक्षकों को गोशालाओं में रखे निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा जुटाने में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश सामने आते ही शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

जानकारी के अनुसार, जिले की गोशालाओं में निराश्रित गोवंशों के लिए भूसे की व्यवस्था करने हेतु प्रशासन ने अभियान शुरू किया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को करीब 1500 कुंतल भूसा जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके बाद बीएसए कार्यालय ने विभिन्न खंड शिक्षा अधिकारियों को लक्ष्य आवंटित किया।

वायरल पत्र में प्रत्येक स्कूल से लगभग 46 किलो भूसा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। नवाबगंज ब्लॉक से जारी पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया। शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही उन पर चुनाव ड्यूटी, जनगणना, सर्वे, पोर्टल फीडिंग समेत कई गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव है। ऐसे में भूसा इकट्ठा करने जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारी देने से पढ़ाई प्रभावित होगी।

शिक्षक संगठनों ने भी इस आदेश पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षकों का मूल कार्य बच्चों को शिक्षा देना है, लेकिन लगातार उन्हें अन्य सरकारी कार्यों में लगाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पहले से ही स्टाफ की कमी बनी हुई है।

वायरल पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि लक्ष्य पूरा न होने पर संबंधित स्कूलों से जवाब-तलब किया जाएगा। इसी बात को लेकर शिक्षकों में अधिक नाराजगी देखी गई। हालांकि विभाग की ओर से किसी कठोर कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

मामले पर मीरगंज के खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश कुमार ने कहा कि डीएम के निर्देश पर शिक्षकों से गोशालाओं के लिए स्वैच्छिक सहयोग मांगा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूसा दान न करने पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वहीं नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी ने भी फोन पर बताया कि पत्र में हुई भाषा संबंधी त्रुटि को लेकर गलतफहमी पैदा हुई है और इसका खंडन कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि अभियान पूरी तरह सहयोग और स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित है।

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