
चेहरा छिपाने के लिए पहनता था कैप, फिर भी AI ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
जयपुर | विशेष रिपोर्ट
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 48 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का खुलासा अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। वजह सिर्फ लूट नहीं, बल्कि अपराधी को पकड़ने में इस्तेमाल हुई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक है। पुलिस ने पहली बार हाईटेक AI तकनीक का सहारा लेकर उस आरोपी को गिरफ्तार किया, जो लगातार अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था।
क्या था पूरा मामला?
जयपुर के भांकरोटा इलाके में बदमाशों ने एक बुजुर्ग दंपती को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा और डराकर करीब 47.90 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि मुख्य आरोपी निखिल तिवाड़ी हर जगह कैप पहनकर घूमता था ताकि CCTV कैमरों में उसका चेहरा साफ दिखाई न दे।
CCTV से नहीं मिला सुराग
पुलिस ने आसपास के इलाकों, सड़कों और सोसायटियों के CCTV फुटेज खंगाले, लेकिन हर फुटेज में आरोपी सिर पर कैप लगाए नजर आया। इससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहा था।
फिर मैदान में उतरी AI तकनीक
जांच आगे बढ़ाने के लिए पुलिस की तकनीकी टीम ने अलग-अलग कैमरों से मिले फुटेज के स्क्रीनशॉट इकट्ठा किए। इसके बाद AI की मदद से आरोपी की एक संभावित तस्वीर तैयार की गई। इस तस्वीर को पुलिस रिकॉर्ड और क्राइम डेटाबेस से मिलाया गया, जहां आरोपी की पहचान निखिल तिवाड़ी के रूप में हुई।
मोबाइल डेटा और सर्विलांस से मिला बड़ा सुराग
पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल डेटा के जरिए पता चला कि आरोपी की पत्नी का मोबाइल उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर इलाके में एक्टिव है। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और कई इमारतों के सिक्योरिटी गार्ड से पूछताछ की।
बस में भागने की कोशिश, टोल प्लाजा पर गिरफ्तारी
जांच के दौरान सूचना मिली कि आरोपी बस के जरिए दूसरे शहर भागने की तैयारी में है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक टोल प्लाजा पर बस को रुकवाया। तलाशी के दौरान आरोपी निखिल तिवाड़ी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के लिए AI बना नया हथियार
इस कार्रवाई के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में अपराधियों को पकड़ने के लिए AI तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है। खासकर ऐसे मामलों में जहां आरोपी चेहरा छिपाने या पहचान बदलने की कोशिश करते हैं।
क्या बदल सकती है देश की जांच व्यवस्था?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित फेस रिकंस्ट्रक्शन और डेटा एनालिसिस तकनीक आने वाले समय में पुलिस जांच की तस्वीर बदल सकती है। इससे अपराधियों की पहचान तेज और सटीक तरीके से संभव हो सकेगी।
बड़ा सवाल
अब सवाल यह है कि जब अपराधी AI से बच नहीं पा रहे, तो क्या आने वाले समय में देश की पुलिसिंग पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित हो जाएगी?

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