
जयपुर । राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत करीब 6,500 संविदा नर्सिंगकर्मियों को सेवा से हटाए जाने के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस बीच जयपुर के महिला चिकित्सालय में कार्यरत एक नर्सिंगकर्मी ने कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
मृतक की पहचान दौसा निवासी 30 वर्षीय दीपक चरवाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह पिछले तीन वर्षों से प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से जयपुर के महिला चिकित्सालय में कार्यरत था। परिजनों और सहकर्मियों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर उसे बताया गया कि उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं और उसका नाम हाजिरी रजिस्टर से हटा दिया गया है। इसके बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गया।
घटना के बाद जयपुर सहित प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में नर्सिंगकर्मियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी सरकार से रोजगार सुरक्षा और स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि दीपक के परिवार में चार साल का एक बच्चा है और उसकी पत्नी गर्भवती है। परिवार का आरोप है कि नौकरी जाने की चिंता के कारण वह लंबे समय से तनाव में था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य सरकार ने निजी एजेंसी के माध्यम से एक हजार से अधिक नर्सिंगकर्मियों की नियुक्ति की थी, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर लगभग 6,500 हो गई। इन्हें शुरुआत में 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था, जो बढ़कर 9,185 रुपये हो गया था।
सरकार ने अब इन कर्मियों को हटाकर परीक्षा के माध्यम से पांच वर्ष के संविदा कार्यकाल पर नई नियुक्तियां करने का निर्णय लिया है। वहीं, प्रभावित नर्सिंगकर्मी मांग कर रहे हैं कि उन्हें अनुभव के आधार पर समायोजित या नियमित किया जाए। सरकार ने तीन हजार नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की है, जिसमें इन कर्मियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
मामले को लेकर प्रदेशभर में नाराजगी बनी हुई है और नर्सिंगकर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

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