Categories

June 17, 2026

समाजवादी पार्टी के बैनरों से आजम खान क्यों गायब? मुस्लिम नेतृत्व से दूरी या नई राजनीतिक रणनीति, उठ रहे बड़े सवाल

लखनऊ/बरेली। समाजवादी पार्टी (सपा) की राजनीति में कभी ऐसा दौर था जब पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के साथ आजम खान की तस्वीर हर बड़े कार्यक्रम, पोस्टर और बैनर पर प्रमुखता से दिखाई देती थी। पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे आजम खान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में इतना प्रभावशाली माना जाता था कि उन्हें अक्सर “उत्तर प्रदेश का दूसरा मुख्यमंत्री” तक कहा जाता था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

हाल ही में बरेली में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव द्वारा आयोजित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्यक्रम के बैनर और पोस्टरों में न तो आजम खान वोकी तस्वीर दिखाई दी और न ही किसी अन्य बड़े मुस्लिम नेता को प्रमुखता दी गई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर समाजवादी पार्टी की रणनीति में क्या बदलाव आया है और क्या पार्टी मुस्लिम नेतृत्व को लेकर नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

कभी सपा की पहचान थे आजम खान

 

आजम खान लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के सबसे प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते रहे हैं। रामपुर से कई बार विधायक रहे आजम खान ने पार्टी संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव सरकार तक उनकी राजनीतिक हैसियत लगातार मजबूत बनी रही।

2012 में सपा सरकार बनने के बाद आजम खान को कैबिनेट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उस समय राजनीतिक विश्लेषक उन्हें सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक मानते थे।

 

बैनरों से तस्वीरें गायब होने पर उठे सवाल प्रदेश अध्यक्ष का फोटो भी गायब 

 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हाल के वर्षों में सपा के प्रचार अभियान में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। पार्टी के अधिकांश कार्यक्रमों में अब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, डॉ. राम मनोहर लोहिया, मुलायम सिंह यादव और अन्य समाजवादी विचारकों की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई देती हैं, जबकि आजम खान की तस्वीरें बहुत कम नजर आती हैं।

बरेली में आयोजित पीडीए कार्यक्रम के बैनर ने इस चर्चा को और हवा दे दी। कार्यक्रम का उद्देश्य अल्पसंख्यकों समेत विभिन्न वर्गों को जोड़ना था, लेकिन पोस्टरों में किसी बड़े मुस्लिम चेहरे की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगे। समाजवादी पार्टी के उत्तरप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पल भी बैनर में नजर नहीं आए

 

क्या पीडीए राजनीति है वजह?

 

कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी अब अपनी राजनीति को केवल किसी एक समुदाय के प्रतिनिधित्व तक सीमित रखने के बजाय पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के व्यापक सामाजिक गठबंधन के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी का फोकस सामूहिक सामाजिक समीकरणों पर अधिक दिखाई दे रहा है।

हालांकि, यह केवल राजनीतिक विश्लेषण है। समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है कि उसने किसी विशेष नेता या समुदाय से दूरी बनाई है।

 

आजम खान की कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियां भी चर्चा में

 

राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आजम खान विभिन्न कानूनी मामलों और लंबी न्यायिक प्रक्रियाओं के कारण सक्रिय राजनीति में पहले जैसी भूमिका नहीं निभा पाए हैं। इससे भी पार्टी के प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी उपस्थिति कम हुई है।

 

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

 

सपा के बैनरों से आजम खान की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दल भी सवाल उठा रहे हैं। कुछ राजनीतिक विरोधियों का आरोप है कि पार्टी अब अपनी छवि को नए तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। वहीं सपा समर्थकों का तर्क है कि पार्टी का फोकस अब व्यक्तियों के बजाय संगठन और व्यापक सामाजिक गठबंधन पर है।

 

बड़ा सवाल बरकरार

 

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आजम खान की तस्वीरों का बैनरों से गायब होना केवल एक संगठनात्मक बदलाव है, या फिर समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति में कोई बड़ा परिवर्तन हो रहा है? क्या यह पीडीए राजनीति का नया स्वरूप है या पार्टी की प्रचार शैली में बदलाव?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में समाजवादी पार्टी की गतिविधियों और नेतृत्व के निर्णयों से ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल बरेली के एक कार्यक्रम से शुरू हुई चर्चा प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेत तलाशने का विषय बन गई है।

About The Author