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June 17, 2026

बरेली में करोड़ों की ज़मीन का खेल! 1.93 लाख में चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप, नगर निगम पर घोटाले की गूंज

बरेली। शहर के पॉश इलाके डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम से सटी नगर निगम की बेशकीमती भूमि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल ने नगर निगम के अधिकारियों और एक निजी कंपनी के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को मात्र 1.93 लाख रुपये में चहेती निजी फर्म एडटेक को लाभ पहुंचाने के लिए सौंप दिया गया। संगठन ने इस पूरे मामले की जांच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराने की मांग की है।

 

3 करोड़ के फूड कोर्ट पर उठे सवाल

व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार महरोत्रा का आरोप है कि डीडीपुरम में नगर निगम की जमीन पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए फूड कोर्ट में शुरू से ही नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि जिस भूमि पर वर्षों से छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर अपना रोजगार चला रहे थे, उन्हें बिना किसी पुनर्वास योजना और स्पष्ट नीति के वहां से हटाकर आजीविका संकट में डाल दिया गया।

 

गरीब हटे, बड़ी कंपनियां आईं’

व्यापार मंडल का आरोप है कि गरीब और छोटे दुकानदारों को हटाकर नामी कंपनियों के लिए रास्ता साफ किया गया। इतना ही नहीं, जिन वेंडरों के पुनर्वास की बात कही जा रही है, उनके लिए दुकानों की कीमत लाखों रुपये रखी गई है, जिसे वहन करना अधिकांश गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं है।

एडटेक पर मेहरबानी का आरोप

संगठन ने आरोप लगाया है कि निजी फर्म एडटेक, जिसके संचालक राजीव तनेजा बताए जा रहे हैं, को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए बेहद कम दरों पर टेंडर जारी किए गए। व्यापार मंडल का दावा है कि वित्तीय लेनदेन और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हुई तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है। अधिकारियों और कंपनी के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।

 

बिना स्वीकृति बन रही मार्केट?

मामले को और गंभीर बनाते हुए व्यापार मंडल ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की ओर से बनाई जा रही बड़ी मार्केट के पास बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की स्वीकृति नहीं है। साथ ही अग्निशमन विभाग से आवश्यक एनओसी भी नहीं ली गई है। हैरत की बात यह बताई जा रही है कि यह निर्माण शहर के सबसे पॉश इलाके में और बीडीए वीसी के आवास के नजदीक हो रहा है।

 

नगर आयुक्त ने सभी आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि परियोजना पूरी तरह नियमों के तहत संचालित की जा रही है और शहर में तेजी से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या पक्षपात के आरोपों को गलत बताया।

 

अब सरकार की ओर टिकी निगाहें

व्यापार मंडल ने पूरे मामले की जांच विजिलेंस, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े अधिकारियों की भूमिका उजागर हो सकती है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इन गंभीर आरोपों पर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

नोट: यह रिपोर्ट व्यापार मंडल द्वारा लगाए गए आरोपों और नगर निगम के पक्ष पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।

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