
2 साल पुराने मामले में बड़ी राहत, अमेरिकी अदालत ने अभियोजन की मांग पर केस खत्म करने की मंजूरी दी
उद्योगपति गौतम अडाणी को अमेरिका में चल रहे कथित रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले में बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी अदालत ने अडाणी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला नवंबर 2024 में दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों से जुड़ी धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।
अमेरिकी न्याय विभाग ने पहले ही अदालत से मामले को आगे नहीं बढ़ाने की मांग की थी। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गैरोफिस ने मामले को खत्म करने की मंजूरी दी।
क्या था पूरा मामला?
अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि 2020 से 2024 के बीच भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर 25 करोड़ डॉलर से अधिक की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस योजना से अडाणी समूह को करीब 2 अरब डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद थी। मामले में गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए थे।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया था कि अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाते समय कंपनी की ओर से रिश्वत से जुड़े जोखिमों की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
अडाणी समूह ने आरोपों से किया था इनकार
गौतम अडाणी और अडाणी समूह ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया था। समूह की ओर से कहा गया था कि आरोप निराधार हैं और कंपनी ने किसी गलत गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया।
फैसले के बाद गौतम अडाणी का बयान
अदालत के फैसले के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण दौर में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका विश्वास कायम रहा। अडाणी ने उन लोगों का भी आभार जताया जिन्होंने उन पर, व्यवस्था और भारत की न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।
उन्होंने आगे कहा कि अडाणी समूह देश के निर्माण, दीर्घकालिक मूल्य निर्माण और बड़े उद्देश्य के लिए काम करता रहेगा।
अहम बात
अमेरिकी अदालत द्वारा केस खारिज किया जाना आरोपों में दोषमुक्ति (acquittal) के समान नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत ने आपराधिक मामले को समाप्त करने की मंजूरी दी है।
गौतम अडाणी ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा— “जय हिंद।”

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