
काठमांडू । नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। टिमुरे और स्याब्रुबेसी क्षेत्र में घर, बाजार, वाहन और पुल प्रभावित हुए हैं। टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मियों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
आखिर नेपाल में अचानक बाढ़ क्यों आई?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बाढ़ के पीछे भूस्खलन से नदी का रास्ता अचानक अवरुद्ध होना एक प्रमुख वजह हो सकती है। ल्हेंदे नदी का प्रवाह मलबे से रुक गया और पानी जमा होने के बाद अचानक अवरोध टूट गया, जिससे पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहा और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई।
इसी दौरान क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया। वैज्ञानिक इस भूकंप को संभावित ट्रिगर के तौर पर देख रहे हैं।
इसके अलावा इस क्षेत्र में बड़े हिमताल मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिक Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) की संभावना की भी जांच कर रहे हैं। पिछले साल 8 जुलाई को भी ल्हेंदे नदी में अचानक बाढ़ आई थी, जिसका कारण उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण में हिमताल विस्फोट पाया गया था।
खास बात यह है कि इस दौरान कोई सामान्य मानसूनी भारी बारिश नहीं हुई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार मंगलवार और बुधवार को क्षेत्र में भारी बारिश नहीं हुई, इसलिए अचानक आया पानी किसी प्राकृतिक अवरोध के टूटने से आने की आशंका ज्यादा है।
तबाही के बाद राहत-बचाव अभियान तेज
नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत-बचाव अभियान में लगाया है। सेना और निजी कंपनियों के कई हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाकों में राहत और निकासी कार्य में जुटे हैं।
अब तक भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से कम से कम 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि घायलों का इलाज रसुवा जिला अस्पताल में चल रहा है। गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू भेजा गया है।
भारतीय यात्रियों पर भी पड़ा असर
अचानक आई बाढ़ से नेपाल-चीन सीमा का रसुवागढ़ी क्षेत्र भी प्रभावित हुआ। नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक संपर्क से बाहर हुए 384 पर्यटकों और यात्रियों में कम से कम 105 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय शामिल हैं।
बिहार और यूपी में बढ़ा खतरा
नेपाल से आने वाला पानी आगे त्रिशूली नदी में मिलता है और इसका पानी गंडक नदी प्रणाली में पहुंचता है। ऐसे में बिहार और उत्तर प्रदेश में भी फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है।
बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में अलर्ट जारी किया गया है। वाल्मीकिनगर बैराज के 36 फाटक खोल दिए गए हैं और जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में कुशीनगर और महराजगंज प्रशासन को भी सतर्क किया गया है। कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मरचहवा, शिवपुर समेत कई गांवों को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम योगी ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर चिंता जताई है। उन्होंने महराजगंज और कुशीनगर में गंडक एवं नारायणी नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यानी नेपाल की इस तबाही की सबसे अहम कड़ी भूस्खलन से नदी का रास्ता रुकना, अचानक अवरोध टूटना और संभावित भूकंपीय या हिमताल घटना है। अब इसका पानी भारत में गंडक और नारायणी नदी के जरिए खतरा बढ़ा रहा है।

Related Posts
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता; पेट्रोल-डीजल और LPG महंगी होने का खतरा
अलर्ट : तिब्बत में फिर फटी झील, नेपाल में बढ़ा बाढ़ का खतरा; गांव खाली कराने के आदेश
अमेरिका में गौतम अडाणी के खिलाफ रिश्वत-धोखाधड़ी का केस खारिज