
सुभलेश यादव की टीम और सपा की अंदरूनी राजनीति पर पहले ही उठाए थे सवाल, धर्मेंद्र कश्यप के ‘टाटा-बाय-बाय’ से फिर गरमाई चर्चा
बरेली। समाजवादी पार्टी की बरेली जिला इकाई में संगठनात्मक नियुक्तियों और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच 21 सितंबर को Lok Awaaj ने सूत्रों के हवाले से जिन संभावित नामों और सियासी समीकरणों की चर्चा की थी, मौजूदा घटनाक्रम उन्हें एक बार फिर चर्चा में ला रहा है।
उस समय जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की ओर से संभावित दावेदारों को लेकर भेजी गई सूची और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए गए थे। अब धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी से ‘टाटा-बाय-बाय’ कहने वाले संकेत ने बरेली की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक जानकार इसे कीर्ति कश्यप की सपा में संभावित दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम मान रहे हैं। हालांकि, इस पूरे राजनीतिक समीकरण की तस्वीर आगे होने वाले फैसलों के बाद ही साफ होगी।
नई टीम को लेकर भी उठाए थे सवाल
Lok Awaaj ने सपा जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की नई टीम को लेकर भी सवाल उठाए थे। उस समय चर्चा में आया था कि संगठन में कुछ ऐसे चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई है, जिनका अतीत विवादों से जुड़ा रहा है।
इनमें परवेज यार खां का नाम भी शामिल था, जिन्हें जिला सचिव की जिम्मेदारी दी गई। उपलब्ध रिकॉर्ड के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रेमनगर थाने में उनकी हिस्ट्रीशीट का उल्लेख किया गया है और उनके खिलाफ अलग-अलग वर्षों में मुकदमे दर्ज होने की बात कही गई है।
बताया गया है कि इन मामलों में बलवा, पुलिस पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा, तोड़फोड़, धमकी और धोखाधड़ी जैसी धाराओं में मुकदमे शामिल रहे हैं। हालांकि, संबंधित आरोपों में अदालत से अंतिम दोषसिद्धि और वर्तमान कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है, इसलिए इन्हें आरोप/मुकदमों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
संगठन में नियुक्तियों पर बढ़ी निगाह
सपा की जिला इकाई में लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम के बाद अब पार्टी के भीतर संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर यह चर्चा तेज है कि क्या आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व बरेली संगठन में पुराने अनुभव, स्थानीय समीकरण और विवादित छवि वाले चेहरों की नए सिरे से समीक्षा करेगा?
21 सितंबर को जिन राजनीतिक समीकरणों और नामों को लेकर सवाल उठाए गए थे, उनके बाद सामने आए घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी बरेली में संगठन और संभावित चुनावी दावेदारों को लेकर क्या रणनीति अपनाती है।

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