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September 13, 2026

हरियाणा : नूंह में मिलावटी दूध का खेल! ‘अतिरिक्त दूध’ की आपूर्ति पर उठे सवाल, छापेमारी के बावजूद कारोबार पर लगाम नहीं

नूंह। दूध को बच्चों की सेहत और परिवार के पोषण का आधार माना जाता है, लेकिन नूंह में मिलावटी दूध, पनीर और घी के कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का दावा है कि जिले में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का हिस्सा है। इसके बावजूद जिले से बाहर भेजे जाने वाले दूध की मात्रा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त दूध आ कहां से रहा है।

आरोप है कि मांग और आपूर्ति के अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग मिलावटी दूध तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं। इस दूध और इससे बने उत्पादों की आपूर्ति गुरुग्राम, फरीदाबाद, दिल्ली, नोएडा और मानेसर तक किए जाने की बात सामने आती रही है।

छापेमारी के बाद भी उठ रहे सवाल

मिलावटी दूध तैयार करने और बाहर भेजे जाने की शिकायतों पर समय-समय पर छापेमारी की कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। कई मामलों में दूध अथवा दूध से बने उत्पाद संदिग्ध पाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई लगातार और प्रभावी नहीं होने के कारण इस कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।

कैसे तैयार होता है नकली दूध?

जानकारों के मुताबिक कुछ मामलों में पानी, दूध पाउडर, खाद्य तेल और अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर दूध जैसा मिश्रण तैयार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। हालांकि किसी विशेष उत्पाद में क्या मिलाया गया है, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही की जा सकती है। इसलिए बिना जांच किसी दूध या उत्पाद को मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा।

नामी कंपनियों की सप्लाई पर भी सवाल

नूंह से दूध खरीदने वाली कुछ नामी कंपनियों की सप्लाई को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठने की बात कही गई है। स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। हालांकि किसी कंपनी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित दूध के नमूने, दस्तावेज और सप्लाई रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

प्रशासन से नियमित जांच की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल शिकायत मिलने या विशेष अभियान चलाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ रोका जा सके।

मेवात विकास मंच के महासचिव आरिफ अली चंदेनी ने भी मिलावटी दूध के कारोबार को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए लगातार अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मिलावट केवल खाद्य पदार्थों में धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़ है।

वहीं, नूंह की सिविल सर्जन ज्योत्सना के अनुसार विभाग की ओर से समय-समय पर खाद्य पदार्थों की जांच कराई जाती है। कई मामले दर्ज हैं और कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। उनका कहना है कि यदि कहीं मिलावट का मामला सामने आता है तो जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि नूंह में दूध की वास्तविक उपलब्धता और बाहर भेजी जा रही मात्रा का प्रशासनिक स्तर पर मिलान कब होगा और मिलावटी दूध के आरोपों की लैब जांच के जरिए पूरी सच्चाई कब सामने आएगी?

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