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June 15, 2026

हाथरस: कोर्ट के स्टे के बावजूद भूमि पर कब्जे का आरोप, लेखपाल नरेंद्र ओर कानूनगो की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

हाथरस। तहसील सासनी क्षेत्र के ग्राम बेहटा ( सलेमपुर ) स्थित गाटा संख्या 437 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पीड़ित पक्ष ( राजकुमार सिंह ) का आरोप है कि न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश (स्टे) के बावजूद भूमि पर बाउंड्री निर्माण कर कब्जा कराने का प्रयास किया गया। मामले में संबंधित लेखपाल नरेंद्र और राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।ओर इस जमीन के साथ ही चमनेश निवासी दौलतपुर की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है

पीड़ित परिवार के अनुसार विवादित भूमि का बैनामा लगभग 45 वर्ष पूर्व हुआ था जिसका मालिकाना हक अभी भी उन्हें के पास है और तब से भूमि उनके कब्जे में रही है। उनका आरोप है कि जुलाई 2025 में कथित रूप से राजस्व विभाग की मिलीभगत से भूमि दुर्गपाल निवासी जैतपुर के नाम दर्ज करा दी गई। इसके बाद परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और दिसंबर 2025 में स्थगन आदेश प्राप्त किया, जो अभी भी प्रभावी बताया जा रहा है।

 

DM से शिकायत के बाद कब्जा ओर तेज हुआ 

कोर्ट से स्टे होने के बाद रेडीमेड बाउंड्री लगाकर लेखपाल द्वारा कब्जा कराने का प्रयास किया गया जिसकी शिकायत DM से की गई DM ने जांच SDM को दी जिसकी जानकारी लेखपाल को लगी ओर लेखपाल ने सेकेंड सैटरडे ओर संडे का फायदा लेते है शुक्रवार रात को बची हुई रेडीमेड बाउंड्री भी लगवा दी सूत्रों के मुताबिक लेखपाल नरेंद्र खुद मौजूद रहे।w

IGRS पर भी शिकायत लेखपाल के आगे फेल 

इस मामले की शिकायत पहले भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई थी शिकायत करता स्वर्गीय शिमला देवी के पति है ओर जमीन लड़को के नाम चली गई थी जिसको लेखपाल ने ये कहकर आख्या लगा दी कि शिकायत करता का ज़मीन से कोई लेना देना नहीं , अब सवाल ये है कि क्या कोई बाप अपने बेटों के पक्ष को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत नहीं कर सकता क्या ?

परिवार का कहना है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने और स्टे लागू होने के बावजूद भूमि पर कब्जे की कोशिशें जारी हैं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया।

NHAI के रिकॉर्ड जमीन पीड़ित पक्ष के पक्ष में होने के दे रहे सबूत

पीड़ित पक्ष का दावा है कि विवादित भूमि मुख्य सड़क से लगी हुई है। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दौरान NHAI ने उनकी भूमि का हिस्सा अधिग्रहित किया था और मुआवजा प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज भी जमा कराए जा चुके हैं। परिवार का आरोप है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद मुआवजा फाइल लेखपाल के हस्तक्षेप के कारण लंबित रखी गई।

 

लेखपाल के खिलाफ पहले भी लग चुके हैं आरोप

स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि संबंधित लेखपाल नरेंद्र का नाम पहले भी भूमि विवादों में सामने आता रहा है। आरोप है कि ग्राम बेहटा ,सलेमपुर के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के निकट स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था, जिसमें सरकारी जमीन पर निजी कब्जा कराने के आरोप लगाए गए थे। जमीन सलेमपुर के प्रधान ओर उनके भाई के पक्ष में चली गई हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में किसी न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी का अंतिम निर्णय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि संबंधित लेखपाल नरेंद्र कई वर्षों से एक ही जिले में तैनात हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि लंबे समय से एक ही क्षेत्र में कार्यरत रहने के कारण उनका प्रभाव बढ़ गया है, जिससे शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि स्थानांतरण और तैनाती से संबंधित निर्णय पूरी तरह शासन और विभागीय नियमों के अधीन होते हैं।

 

प्रशासन से जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी, एसडीएम, पुलिस प्रशासन, मुख्यमंत्री पोर्टल और आईजीआरएस पर शिकायतें दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय के स्टे आदेश, राजस्व अभिलेखों और NHAI के दस्तावेजों की जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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