नई दिल्ली। देश में निजी मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती फीस और छात्रों की सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। दिल्ली की एक महिला ने अपनी बेटी को एक प्रतिष्ठित निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कराने के अनुभव साझा करते हुए दावा किया है कि करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद छात्रों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
महिला के अनुसार, एडमिशन के समय कॉलेज की चमक-दमक और बड़े-बड़े दावों से प्रभावित होकर उन्होंने बेटी का दाखिला कराया, लेकिन बाद में सामने आई हकीकत ने उन्हें निराश कर दिया। उनका कहना है कि भारी फीस के बावजूद छात्रों को खराब हॉस्टल सुविधाएं, निम्न गुणवत्ता का भोजन, साफ पेयजल की कमी और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
महिला ने आरोप लगाया कि फिक्स फीस के अलावा विभिन्न मदों में अतिरिक्त खर्च कराया जाता है। हॉस्टल में निजी कूलर या हीटर लगाने पर जुर्माना लगाया जाता है और एडमिशन के समय जमा कराई गई सिक्योरिटी राशि वापस करने में भी कॉलेज प्रशासन आनाकानी करता है। छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघन पर भी छात्रों से फाइन वसूले जाने का आरोप लगाया गया है।
भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि छात्रों को पौष्टिक आहार नहीं मिलता। सब्जियों में घटिया सामग्री और मिलावटी पनीर इस्तेमाल होने की शिकायत की गई। साथ ही हॉस्टल में स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया गया।
महिला ने यह भी कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों में आज भी रैगिंग और सीनियर-जूनियर संस्कृति छात्रों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। उनके अनुसार, कई छात्र डर और भविष्य की चिंता के कारण शिकायत करने से बचते हैं। विरोध करने वालों को अलग-थलग करने और मानसिक दबाव बनाने जैसी बातें भी सामने आती हैं।
उनका कहना है कि यह समस्या किसी एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि कई निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों और अभिभावकों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित मेडिकल कॉलेज का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। मामला एक अभिभावक के अनुभव और आरोपों पर आधारित है।


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