प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-16सी स्थित वेदांतम आवासीय परियोजना के फ्लैट खरीदारों की याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके लंबित प्रार्थना पत्रों पर कानून के अनुसार तीन माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और न ही फ्लैट खरीदारों को तत्काल मालिकाना हक या सब-लीज डीड देने का आदेश पारित किया।
याचिका में फ्लैटों की सब-लीज डीड निष्पादित कराने और पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से केवल लंबित प्रार्थना पत्रों पर निर्णय कराने का अनुरोध किया गया, जिस पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को कानून के अनुरूप शीघ्र, अधिमानतः तीन माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
इस बीच, अमर उजाला सहित कुछ मीडिया रिपोर्टों में “फ्लैट खरीदारों को मिलेगा मालिकाना हक” शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। हालांकि उपलब्ध हाईकोर्ट आदेश का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि अदालत ने मालिकाना हक देने या रजिस्ट्री कराने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है, बल्कि केवल लंबित प्रार्थना पत्रों पर विधि अनुसार निर्णय लेने का निर्देश जारी किया है।

ऐसे में न्यायालय के आदेश और प्रकाशित खबर के शीर्षक में अंतर दिखाई देता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम अधिकार या मालिकाना हक का निष्कर्ष संबंधित प्राधिकरण के निर्णय अथवा आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।


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