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September 13, 2026

मंत्रियों के बंगलों पर 12 साल में ₹547 करोड़ खर्च, CJP ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर पिछले 12 वर्षों में ₹547.68 करोड़ खर्च किए जाने के दावे को लेकर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने सवाल उठाए हैं। पार्टी ने RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों के आलीशान सरकारी बंगलों के रखरखाव पर खर्च की जा रही इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने में किया जा सकता था।

CJP के मुताबिक, 2014-15 में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर करीब ₹27 करोड़ खर्च हुए थे। यह राशि 2025-26 में बढ़कर ₹92 करोड़ तक पहुंच गई।

12 साल में ₹547.68 करोड़ खर्च का दावा

CJP ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में RTI से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 से 2019 के बीच मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव पर ₹133.9 करोड़, 2019 से 2024 के बीच ₹250 करोड़ और 2024 से 2026 के बीच ₹174.5 करोड़ खर्च किए गए।

पार्टी के मुताबिक, 12 वर्षों में कुल खर्च ₹547.68 करोड़ रहा। CJP ने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्कूलों में आज भी बिजली, पीने के पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो इतनी बड़ी राशि मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर क्यों खर्च की जा रही है।

₹92 करोड़ = 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल’

CJP ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ₹92 करोड़ की राशि से करीब 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल बनाए जा सकते थे। पार्टी ने कहा कि सरकार को अपने खर्च की प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना चाहिए।

पार्टी ने अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। CJP के अनुसार, कई स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

‘धन की कमी नहीं, इच्छाशक्ति की कमी’

CJP का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं के लिए धन की कमी नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार के पास दूसरे क्षेत्रों में खर्च करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है, लेकिन सरकारी स्कूलों की जरूरतों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों का दौरा करने का दावा करते हुए वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब बच्चों को पीने का पानी तक उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है, तो नए स्कूल बनाने और मौजूदा स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए धन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा।

पीएम केयर्स फंड को लेकर भी सवाल

CJP ने पीएम केयर्स फंड में उपलब्ध राशि को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी के मुताबिक, फंड की राशि 2023-24 में ₹7,173.03 करोड़ थी, जो 2024-25 में बढ़कर ₹8,452.07 करोड़ हो गई।

CJP ने सवाल किया कि इस राशि का इस्तेमाल ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता।

पीएम केयर्स फंड की स्थापना 27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी समेत आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और राहत के उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं।

भाजपा ने CJP के आरोप खारिज किए

CJP के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए इन्हें गलत जानकारी पर आधारित राजनीतिक बयानबाजी बताया। भाजपा की गोवा इकाई ने कहा कि पीएम केयर्स फंड आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत के लिए बनाया गया है।

भाजपा ने CJP पर पीएम केयर्स फंड को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि फंड का इस्तेमाल उसके निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया जाता है।

इस तरह मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर हुए खर्च को लेकर CJP और भाजपा आमने-सामने हैं। CJP जहां सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा ने उसके आरोपों को खारिज कर दिया है।

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