देहरादून। उत्तराखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस जांच, शव की पहचान और पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस व्यक्ति को परिवार और पुलिस ने मृत मान लिया, उसका दो बार पोस्टमार्टम कराया गया, अंतिम संस्कार कर दिया गया और हत्या के आरोप में सात लोगों पर मुकदमा भी दर्ज हो गया। लेकिन 13 दिन बाद वही शख्स अचानक अपने घर जिंदा लौट आया।
मामला देहरादून के मसूरी क्षेत्र का है। गिरधर बिष्ट नामक व्यक्ति के लापता होने के बाद नहर में एक अज्ञात शव मिला। परिजनों ने उस शव की पहचान गिरधर बिष्ट के रूप में की। पुलिस ने पहचान के आधार पर आगे की कार्रवाई करते हुए शव का दो बार पोस्टमार्टम कराया और परिवार को सौंप दिया। अंतिम संस्कार भी हो गया। इतना ही नहीं, परिवार की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया।
लेकिन पूरे मामले ने उस समय सनसनी मचा दी जब 13 दिन बाद गिरधर बिष्ट खुद जिंदा घर लौट आए। उनके लौटते ही पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शव का दो-दो बार पोस्टमार्टम हुआ, जिसकी पहचान पुलिस और परिजनों ने की और जिसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, आखिर वह शव किसका था? क्या शव की पहचान में गंभीर लापरवाही हुई या जांच प्रक्रिया में कहीं बड़ी चूक हुई?
गिरधर बिष्ट के जीवित मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि उनसे पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वह इतने दिनों तक कहां थे। साथ ही नहर से मिले शव की वास्तविक पहचान भी अब जांच का विषय बन गई है।
इस घटना ने कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि गलती पहचान प्रक्रिया में हुई, जांच में हुई या अन्य परिस्थितियां जिम्मेदार थीं। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएंगे।


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