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October 20, 2026

14 लाख की रिश्वत केस में सैनिटरी इंस्पेक्टर कोर्ट में पेश, 14 दिन की न्यायिक हिरासत

चंडीगढ़। नगर निगम चंडीगढ़ के सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को 14 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सीबीआई के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद उपनिरीक्षक मुनीष कुमार ने मामले का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान शक्ति शर्मा की ओर से 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और इसे स्वीकार करने की सहमति से संबंधित आरोपों की पुष्टि हुई। सीबीआई ने बातचीत की रिकॉर्डिंग में भी रिश्वत की रकम को लेकर अन्य निगम अधिकारियों के बीच बांटने का कथित संदर्भ मिलने की बात कही है।

ठेकेदार से बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप

मामले की शिकायत सेक्टर-50 निवासी प्रशांत भदौरिया ने 5 अक्टूबर को की थी। शिकायतकर्ता ‘पीपल कनेक्ट सर्विसेज’ नाम से फर्म चलाते हैं, जो नगर निगम के लिए जनशक्ति, जेसीबी और टिपर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

बताया गया कि फर्म को मार्च 2026 में चंडीगढ़ की विभिन्न लैंडफिलिंग साइटों पर अर्धकुशल सेवाएं उपलब्ध कराने का तीन साल का ठेका मिला था। फर्म के करीब 10 लाख रुपये प्रतिमाह के बिल बनते थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा जुलाई 2025 से लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। सितंबर 2026 में लंबित भुगतान और जेसीबी-टिप्पर की उपस्थिति संबंधी विवरण के सिलसिले में हुई मुलाकात के दौरान कथित तौर पर जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक हर महीने एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 14 लाख रुपये की मांग की गई।

बिल रोकने और ठेका रद्द कराने की धमकी का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रिश्वत नहीं देने पर लंबित बिलों को आगे नहीं बढ़ाने और फर्म का ठेका रद्द कराने की धमकी दी गई। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि रिश्वत की रकम नगर निगम के अन्य अधिकारियों के बीच बांटी जाती है।

सीबीआई ने दर्ज किया मामला

सीबीआई के सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), चंडीगढ़ ने 7 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई है।

अब आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सीबीआई मामले की आगे जांच करेगी। जांच एजेंसी कथित रिश्वत की मांग में अन्य अधिकारियों की भूमिका और रकम के बंटवारे से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल कर सकती है।

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