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June 13, 2026

विजय थॉमस की राजनीति पर उठते सवाल

तमिलनाडु ।  हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और विवादों ने “विजय” नाम से जुड़े कई चर्चित चेहरों को फिर सुर्खियों में ला दिया है। चाहे वह तमिलनाडु की राजनीति में उभरते अभिनेता-राजनेता विजय हों, उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक विजय मिश्रा हों या फिर भगोड़े कारोबारी विजय माल्या — तीनों अलग-अलग कारणों से सवालों के घेरे में हैं।

तमिलनाडु में हाल ही में सत्ता में आई विजय की सरकार पर विश्वास मत और कथित हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल होने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। वहीं करूर रैली भगदड़ मामले में भी उनकी सरकार और संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। विपक्ष का आरोप है कि लोकप्रियता के बावजूद प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने में सरकार कमजोर साबित हुई।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता रहे विजय मिश्रा के खिलाफ अदालतों में कई मामलों की सुनवाई जारी है। हाल ही में एक पुराने हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि संपत्ति कब्जाने के मामले में भी अदालत ने कड़ी कार्रवाई की। इन फैसलों ने एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण पर बहस छेड़ दी है।

उधर विजय माल्या का मामला देश के सबसे चर्चित आर्थिक घोटालों में बना हुआ है। भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे माल्या को अदालतें लगातार भारत लौटने के लिए कह रही हैं। उन्हें पहले ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।

इन सभी मामलों ने जनता के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या केवल लोकप्रियता और प्रभाव के दम पर जवाबदेही से बचा जा सकता है, या कानून और लोकतंत्र अंततः अपना काम करते हैं?

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